जब कोई इंसान अपने चाहने वालो का साथ खो देता है , तो उसे कितना बुरा लगता है; उसके दिल को कितनी ठेस पहुचती है; और जब किसी इंसान के सभी चाहने वाले जिन्हें वो अब तक अपना समझता रहा, वे उससे दूरियां बना ले ; और जब उसे ये महसूस वो की अबे उसके दोस्त दोस्त नहीं रहे, तो उस इंसान के मन पर और आत्मा पर क्या गुज़रती है; उसी को मैंने अपनी इस कविता में वियक्त करने का प्रयास किया है;.........ऐसे दुखद समय में इंसान को कैसा लगता है, उन्ही भावों को मैंने इन पंक्तियों में उकेरा है:
बात-बात पर खुश हो जाने की आदत थी मेरी;
यूँ ही औरों से उम्मीद बाँधने की आदत थी मेरी||
पर आज मेरे मन में एक सूनी - सी उदासी छाई है
इस तन्हा जीवन की असलियत सामने आई है||
मैं ठहरा पागल जो उम्मीद लगाये रहता था ,
"ये हैं मेरे हमसफ़र " गौरवान्वित हो संसार से कहता था||
पर आज इसी गर्व का खोखलापन सामने आया है;
उन्हें मेरा मजाक उड़ाते देख मेरा भी जी भर आया है||
ऐसा लगता है मानो एकाएक ही बगिया उजाड़ गयी हो;
मरुस्थल रुपी एस दुनिया से मेरी टहनी उखड गयी हो||
आखों में मेरे आँसू हैं और दिल में है खीज;
ह्रदय विचलित हो उठा है , पनपा है टीस का बीज||
मैंने सदा प्रयत्न किया कि उनके साथ- साथ चलूँ ;
पर अपनी "एहमियत " जान कर , अबी क्या ही अपने हाथ मलूँ ||
देख लिया मैंने की औरो के लिए मैं क्या चीज़ हूँ ;
एक चपचप बोलने वाला ; नगण्य सा नाचीज़ हूँ||
आत्मा है मेरी फूट-फूट कर रोई, पर अब मैं समझ गया हूँ;
ऐसी आशावादी प्रवृति को छोड़ अब मैं संभल गया हूँ ||
आगे से कभी भी इतनी उम्मीद ना बांधूंगा ;
आखों मे औरों की अपनी तस्वीर देख ; अब कभी वहां न झाकूंगा ||
Today, I start the blog which I was planning to do a long time back. Actually, IIT Delhi is the place where all this poetry started, as here I got the motivation to write poetry. Here, I am backed by my poetic friends with whom I will be sailing in this beautiful boat!.....Wish all the readers enjoy the ride of poetic beauty! AMOL -the poetic soul
मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,
पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा,
सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।
-By Dr. Harivansh Rai Bachhan
sahi launde
ReplyDeletemacha raha hai
nice words
thanx yaar!!!!!
ReplyDeleteyaar... tune to emotional kar diya...
ReplyDeleteabe vedant.....jab ye poem likhi to main dukhi thaa ..par tu to emosional na ho!!!!!!!!!!
ReplyDeletegud one....tune khud likhi????....its really touching...
ReplyDeleteand
u r improving!!!
:)
yups....maine hi likhi...........and thanxxxxxxxxxxxxxxxxxx.
ReplyDeleteमस्त !!
ReplyDeletethanx aakansh!
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