मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,
पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा,
सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।
-By Dr. Harivansh Rai Bachhan

Monday, April 11, 2011

संगीत

ये लघु कविता मैंने पारंपरिक भारतीय संगीत के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करने हेतु लिखी है ,,,,

सात सुरों का एक अदभुत संगम है संगीत,
असीम प्रेरणादायक एवं सुखदायक है संगीत |
प्रकाश के वेग से भागती इस जिन्दगी में ,
एक अनोखा सा ठहराव है संगीत ||

थक- हार चुके मन में जब जाता है संगीत ,
एक नई उमंग व चमक से भर देता है संगीत |
रागों की वह मंगलध्वनि कानों का स्पर्श जब करती है ,
बुझी हुई सी बगिया को प्रकाशित कर देता है संगीत ||

वर्षों की अडिग तपस्या से ही आता है संगीत ,
आत्मा- परमात्मा के बीच का पवित्र नाता है संगीत |
तानो , रागों, बंदिशों आदि से सुस्सजित ,
कुदरत के कण-कण में समता है संगीत ||