यारो पोएम हूँ एक लिखता मैं उस हॉस्टल के लिए ;ये कविता मुझे भेजी है मेरे प्यारे , मेरे गुरु ( :-D !!)और मेरे ख़ास दोस्त आनंद विभोर ने. Pseuso -ara मेरे इस दोस्त की हस्ती ही है औरो से कुछ ख़ास और जो उसे मेरे बाकी सब दोस्तों से कुछ अलग बनाती है ! उसके आदेश का पालन करते हुए अब मैं उसकी कविता में अपने कुछ चंद शब्द पिरोते हुए उसे आप लोगों के लिए यहाँ प्रस्तुत करता हूँ| आनंद की कविता का भरपूर आनंद लेना !!:
जहाँ पर रहके मैंने दोनों मिनोर और मेजर दिए ||
जहाँ पर बहती हैं हवाएं सारी की सारी रात
जहाँ पर मिल जाता हैं 24x7 कोई करने को बात;||
जहाँ पर आते जाते दिख जाते हैं रोनक और पलाश
और वोह A9 का वासी जो जाता नहीं कैलाश !!
जहाँ पर पेपर के वक़्त होती है फुल ऑन मगेशी
और A9 में है रहता अपना उस्स्ताद कुरैशी !!
जहाँ पर जब तब सुने देती इशह की पुकार
और A7 से पूरी होती आ ... की दुहार !!
वाडी का क्या बोलूं , उसपर पहले ही है पोएम ...
एक ही कपड़े उसके पास, नहीं है उसमे कुछ भी दम!!
आरा में मैंने जो टाइम बिताया है, उसे मैंने यहाँ बताया है...
यहाँ के लोगो से मैंने अथाह प्यार पाया है!!
--composed by ANAND VIBHORE
machai hai vibhor!!!
ReplyDeletemachax...
ReplyDeleteshukriyaa.....
ReplyDelete-anand vibhore