Today, I start the blog which I was planning to do a long time back. Actually, IIT Delhi is the place where all this poetry started, as here I got the motivation to write poetry. Here, I am backed by my poetic friends with whom I will be sailing in this beautiful boat!.....Wish all the readers enjoy the ride of poetic beauty! AMOL -the poetic soul
मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,
पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा,
सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।
-By Dr. Harivansh Rai Bachhan
Monday, December 13, 2010
Abhibhavakon ki Mamta..
अपने जिगर के टुकड़े को जाब माँ-बाप स्कूल भेजते हैं तो उनकी आखों में जो सपने उमड़ते हैं उसी पर आधारित है मेरी ये कविता "अभिभावकों की ममता" | माता- पिता अपनी संतान से कितना प्यार और दुलार करते हैं उसी को मैंने इस कविता में व्यक्त करने का प्रयास किया है:-
बस में बैठा मैं स्कूल जा रहा था;
बारिश के मौसम का आनंद मैं पा रहा था;
तभी अगले स्टॉप पर रुकी हमारी बस;
बच्चों को लेने जो खड़े थे पीढ पर, बस्ता कस||
अभिभावकों को आखों में था भविष्य का उजाला;
अपनी संतान के लिए थी उनकी आखों में उमंग की हाला;
इन गहरे भावों को मैं बालपन में ही भांप गया;
अपने संतान के प्रति उनके दुलार को पल भर में ही नाप गया||
यह प्यार तो है वक्त के गर्त से भी गहरा;
फूल से कोमल बच्चों का करता है सदा पहरा;
इस प्यार में होती है इतनी ताकत और सच्चाई;
देख उन आखों को मेरी भी आखें भर आई||
उनकी बड़ी -बड़ी आखों में मानो एक गुहार थी;
एक सुन्हेरे भविष्य हेतु ईश्वर से पुकार थी;
वे दृश्य, वे भाव मैं भूल ही नहीं पाता;
इतना दृढ होता है ये माँ-बाप और संतान का नाता||
भावहीन हो मैं ये दृश्य देखता रहा;
माँ बाप के दुलार की गहराई समझता रहा;
ऐसा लगा जैसे आज दिल धड़क उठा हो;
मानो आज स्वर्ग में स्वर्ण कमल खिला हो||
यह कविता एक सच्ची घटना पर आधारित है जो मेरे साथ घटित हुई थी पर उसे व्यक्त करने का मौका मुझे आज मिला है............
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thnx isha for correction!
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